
- Brand: Pravasi Prem Publishing India
- Language: Book
- Weight: 0.15g
- Dimensions: 19.00cm x 15.00cm x 2.00cm
- Page Count: 96
- ISBN: 9788198946263
उत्तर प्रदेश के एक सुदूर गाँव की धूल भरी गलियों से निकलकर देश की धड़कन 'दिल्ली यूनिवर्सिटी' तक पहुँचने का सफ़र सिर्फ़ मीलों की दूरी तय करना नहीं, बल्कि दो अलग दुनियाओं के बीच के फासले को पाटना है। यह किताब महज़ एक संस्मरण नहीं, बल्कि उन लाखों आँखों का अक्स है जो हर साल एक छोटे से सूटकेस में बड़े सपने भरकर महानगर की ओर रुख करती हैं। इसमें दिल्ली जैसे बेगाने शहर में अपनी पहचान बनाने की जद्दोजहद है, तो दूसरी ओर गाँव की उस सोंधी मिट्टी और यादों का मोहपाश है, जो भीड़ में भी पीछा नहीं छोड़ता। महानगर की इस चकाचौंध और आपाधापी के पीछे छिपी कड़वी सच्चाइयों, भाषा की बाधाओं और अस्तित्व के संकट को लेखक ने बड़ी बेबाकी से पन्नों पर उतारा है।
इस किताब में आपको मिलेगा:
· संघर्ष का दस्तावेज़: एक आम युवक का दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रवेश और वहाँ की जटिल चुनौतियों का जीवंत चित्रण।
· स्मृतियों का कैनवासः शहर की ऊँची इमारतों के बीच, गाँव के खेतों और चौपाल की यादों का भावनात्मक द्वंद्व।
· राह दिखाने वाले मशवरेः नए आने वाले विद्यार्थियों के लिए व्यावहारिक सुझाव ताकि वे इस बड़े शहर में खो न जाएँ और न ही अपनी जड़ों को भूलें।
'यह कहानी हर उस शख्स की है, जिसने अपनों को पीछे छोड़ा है, ताकि एक दिन उन्हीं के लिए कुछ बन सके।'
